श्री कृष्ण भगवानुवाच

श्री कृष्ण भगवानुवाच

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
(द्वितीय अध्याय, श्लोक 47)

इस श्लोक का अर्थ है: कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है, लेकिन कर्म के फलों में कभी नहीं… इसलिए कर्म को फल के लिए मत करो और न ही काम करने में तुम्हारी आसक्ति हो। (यह श्रीमद्भवद्गीता के सर्वाधिक महत्वपूर्ण श्लोकों में से एक है, जो कर्मयोग दर्शन का मूल आधार है।)

1 Comments

  1. Avatar John says:

    Hey webmaster
    When you write some blogs and share with us,that is a hard work for you but share makes you happly right?
    yes I am a blogger too,and I wanna share with you my method to make some extra cash,not too much
    maybe $100 a day,but when you keep up the work,the cash will come in much and more.more info you can checkout my blog.
    http://bit.ly/makemoneymethod2018
    good luck and cheers!

Leave a Reply